हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐
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सोमवार, 17 मई 2021

~ हाइकु कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

अंशु विनोद गुप्ता 


हाइकु


1

उड़ी विहान

तितली बन याद

विकल प्राण ।


2

इंसाँ खोदता

कुआँ ,खाई खंदक

पर हितार्थ ।


3

कोकिला गान

मधुर रस घोले

मनुज प्राण ।


4

टेसू पलाश

होरी रँग बिरंगी

गगन हास ।

  

5

श्वेत पाषाण

प्रणय सुप्रतीक

ताजमहल ।


6

धूल धूसरित

बरसात ने धोयी

धरती चूड़ी ।


7

सेमल लाल

बाहों की जयमाल

नव वल्लरी ।

  

8

लवण हीन

जीवन या भोजन

स्वाद विहीन ।


9.

प्रभात लाली

ऊर्जावान प्रेरणा

चैतन्य जग ।


10.

प्रखर ताप

आलस्य मन छाया

दिन बौराया ।

---00---


□  अंशु विनोद गुप्ता

शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

हाइकु कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी रचित हाइगा

हाइकु कवयित्री 

अंशु विनोद गुप्ता 


हाइगा

01.

बेकरारियाँ
जलता ख़ाक होता
नादाँ पतंगा ।

02.

पाहन रोते
धारा तन बींधती
कूल किनारे ।

□ अंशु विनोद गुप्ता



गुरुवार, 1 अगस्त 2019

हाइकु कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी के हाइकु


हाइकु कवयित्री

अंशु विनोद गुप्ता 


हाइकु

--0--


01.
विहँसे पद्म
निज पंकिलता में
ताल तलैया ।
02.
ताल न नीर
पावस में अधीर
दादुर पीर ।
03.
कुआँ मुंडेर
बातें न पनघट
बदला गाँव ।
04.
ताल तलैय्या
दरख़्त नहीँ छाँव
बदला गाँव ।
05.
जल अभाव
ताल सरिता टूटा
प्रणय भाव ।
06.
बदरी सूखी
मर गया सबकी
आँख का पानी ।
07.
पोखर पानी
बोल मेरी मछली
गाती न रानी ।
08.
प्लास्टिक कूड़ा
जलाशयों से पाते
भूख मिटाते ।
09.
कुआँ बीहड़
दादुर चुप सुनता
प्रतिध्वनियाँ ।
10.
मेघ न रोता
धरती पर सूखा
जीवन प्यासा ।
     ¤¤¤   

□ अंशु विनोद गुप्ता


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