हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐
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शुक्रवार, 19 जून 2020

हाइकुकार आरविलि आशेन्द्र लूका जी के हाइकु

हाइकुकार

आरविलि आशेन्द्र लूका 

हाइकु 
--0--

न बिखरना
ज़िंदगी को आज़मा
रख हौसला ।

दिल के रिश्ते
किस्मत से बनते
सम्भालें इसे ।

तकते नैन
विरह की अगन
आओ सजन ।

प्रेम गागरी
करुणा रस भरी
स्नेहिल मातृ ।

टूटे सपने
रूठे सब अपने
मनाऊं कैसे ?

प्रभु हमारा
दुःख भंजनहारा
तारणहारा ।

झांकता सूर्य
अलसाई सी धूप
मेघों के बीच ।

मां की ममता
गई है लाने दाना
चूज़ा है भूखा ।
---0---

□ आरविलि आशेन्द्र लूका
ओम नगर, जरहाभाटा बिलासपुर 
(छत्तीसगढ़)

बुधवार, 14 अगस्त 2019

हाइकुकार आर्विली आशेन्द्र लूका जी के हाइकु

हाइकुकार

आर्विली आशेन्द्र लूका

हाइकु 


टूटे सपने
रूठे सब अपने
मनाऊं कैसे ।

प्यार के बोल
कंठ से जो निकले
दूर शिकवे ।

तिरंगा प्यारा
जब से लहराया
दुश्मन हारा ।

कटते वन 
न खेलें प्रकृति से
बचायें वृक्ष ।

पिता का हाथ
सिर पर जिसके
करता नाज़ ।

आग उगला
सूरज का ये गोला
तपती धरा ।
~ • ~

□  आर्विली आशेन्द्र लूका

बुधवार, 7 अगस्त 2019

हाइकुकार आर्विली आशेन्द्र लूका जी के हाइकु


हाइकुकार

आर्विली आशेन्द्र लूका


हाइकु 


वक़्त की मार
आवाज़ न करती
निपटा देती ।

न बिखरना
ज़िंदगी को आज़मा
रख हौसला ।

मुस्कुराकर
जो गम पीना सीखा
सफल हुआ ।

भूखा न सोये
फुटपाथों में कोई
मुहिम छेड़ें ।

प्रभु ने दिया
आशीष बेशूमार
हम भी बाटें ।

आग उगला
सूरज का ये गोला
तपती धरा ।

कटते वन
कांक्रीट की सड़कें
वजह बना ।

जल संचय
कर न पाएं हम
ये सोचें जरा ।

कटते वन 
न खेलें प्रकृति से
बचायें वृक्ष ।

पौधे लगायें
सीचें जीवन भर
चैन से रहें ।

माता का स्पर्श
पाते ही आया हर्ष
मिला उत्कर्ष ।

माँ का आँचल
सुरक्षित रखता
हरेक पल ।

माँ का चरण
सुन्दर अंजुमन
करूँ नमन ।

मिली सुरक्षा
माता के आँचल में 
बच्चे निडर ।

पिता का हाथ
सिर पर जिसके
करता नाज़ ।

ममत्व प्रेम 
चिरस्थायी रहता
सुरक्षा देता ।

□  आर्विली आशेन्द्र लूका

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