हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐
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सोमवार, 22 नवंबर 2021

चित्र आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता, नवम्बर-2021

चित्र आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता

संचालक मंडल

हाइकु से हाइबुन प्रवाह 

चयनित प्रतिभागी

(माह - नवम्बर, क्र. 19)


प्रविष्टि के 21 हाइकु


1.

प्यारा जलज

हंसिका सैर करे 

शोभा बढ़ाए ।


~ बन्दना गुप्ता 


2.

जल क्रीड़ा में

मदमस्त खग है

देखे नयन ।


~ जाविद अली


3.

चरित्र उच्च

स्थान का न महत्त्व

माता के प्रिय ।


~ राजश्री राठी 


4.

मन बत्तख

हंसती हरियाली

खिलें कमल ।


~ कविता कौशिक 


5.

मन है शान्त

मन चाहा एकान्त

रंगीन यादें ।


~ निर्मला पांडेय


6.

देखे कँवल

हंसनी नैन जल

बहते पल ।


~ अमिता शाह "अमी"


7.

मोहक दृश्य

पद्म बतख देखूँ

भ्रमित दृग ।


~ मीरा जोगलेकर 


8.

जलज खिले

निहारे जल सृष्टि

विरही हंस ।


~ शर्मिला चौहान 


9.

निश्चिंत सा है

पद्म में विचरता 

हरित साक्ष्य ।


~ निर्मला सुरेन्द्रन


10.

सलिल सुधा

सरसे सरोवर

हंस सरोज ।


~ शीला तापड़िया 


11.

गहराइयाँ

डूबा नही पाएंगी

आता तैरना ।


~ ए. ए. लूका


12.

पद्म कुमुदी 

हंसवाहिनी शारदे 

जल जगती ।


~ कल्पना कामदार 


13.

पंक में पले

कलुषता से परे

पुनीत पद्म ।


~ विद्या चौहान 


14.

मन की झील

हंस कमल सम

पवित्र हुई ।


~ शीला भार्गव 


15.

हंस ले मोती

पंकज में न पंक

पानी हटा के ।


~ देवयानी बनर्जी 


16.

स्थिर जल में

अचल राजहंस

खिलते पद्म ।


~ रेशम मदान 


17.

पानी बीच हैं

कमल औ' बदक

फिर भी सूखे ।


~ संतोष बुद्धराजा 


18.

हंस, कमल

ज्ञान सतह पर

विनय, शील ।


~ अल्पा जीतेश तन्ना 


19.

ताल में हंस

नीर क्षीर विभेद

तैरते कंज ।


~ गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"


20.

खडी कलियां 

पंकज  मुस्कुराते

बतख देखे ।


~ पूनम मिश्रा "पूर्णिमा"


21.

पंक के साथ

हंस कमल वास

फिर भी पाक ।


~ रूबी दास 

☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆

शनिवार, 23 अक्टूबर 2021

चित्र आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता

चित्र आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता

हाइकु से हाइबुन प्रवाह

(माह - अक्तूबर, क्र. 18)


प्रविष्टि के 20 हाइकु


1.

प्यासी चिड़ियां 

एक थाली ज्ञान की 

तृष्णा ना मिटे ।


~ बन्दना गुप्ता 


2.

साथी है संग 

जल से ही जीवन

हरित क्रांति ।


~ राजश्री राठी 


3.

माली ने रखा

पंछी के वास्ते पानी

दया जीव को ।


~ देवयानी बनर्जी 


4.

पानी का पात्र

दानों की चिंता पर

भारी है सोच ।


~ कविता कौशिक 


5.

जन्नत मिली

मिल बैठ के पिएं

मद्य दो बूंद ।


~ प्रकाश काम्बले


6.

खोयी चहक

आँगन में सकोरा

टेर लगाता ।


~ विद्या चौहान 


7.

बोले चिड़िया

लोग रखते पानी

सोच सुहानी ।


~ अमिता शाह "अमी"


8.

इत्ता सा पानी

क्या नहाएं क्या पियें

चोंच तो डूबे ।


~ मीरा जोगलेकर 


9.

चिडा युगल

जलपात्र में जल

नैना सजल ।


~ गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"


10.

हम पखेरू

बूंद बूंद सहेजे

सलिल सुधा ।


~ शीला तापड़िया 


11.

हम दोनों यूँ

देखें छाया अपनी

संग संग में ।


~ संतोष बुद्धराजा


12.

स्थिर है नीर 

पकी मिट्टी का पात्र

पंछी की छाया ।


~ रूबी दास 


13.

जीवों में प्रीति

जल तत्व समान

महत्त्वपूर्ण ।


~ अंजुलिका चावला 


14.

मनु महान

रखे हमारा ध्यान

मिटे तिसान ।


~ सुषमा अग्रवाल 


15.

मृत्तिका पात्र

तृप्त चिड़िया मन 

शीतल जल ।


~ रेशम मदान 


16.

हरित क्रांति

सजल धरा मनु

प्रेम गोचर ।


~ शर्मिला चौहान 


17.

हमसफर

जीना हुआ दुश्वार

नीर न पास !


~ ज्ञान भंडारी 


18.

ढूंढते छत

फैली है महामारी 

नहीं ठिकाना ।


~ निर्मला पांडेय 


19.

मिल के बैठी

सहेली बतियाई

तृषा छीपाई ।


~ कल्पना कामदार 


20.

प्यासे परिंदे

जल तश्तरी देख

खुश हो जाते ।


~ पूनम मिश्रा "पूर्णिमा"

☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆

मंगलवार, 21 सितंबर 2021

हाइकु ताँका प्रवाह, चित्र आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता क्र. 17, सितम्बर ~ 2021

हाइकु ताँका प्रवाह 

चित्र आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता

(माह - सितम्बर, क्र. 17)

चयनित हाइकु

प्रतियोगिता में प्रविष्ट 23 हाइकु 


हाइकु 

1.

दिव्य ज्योति

जागृत की मुझमें

हे मेरे बुद्ध ।


~ निर्मला पांडेय


2.

नहीं समाते

नन्हें हाथ हैं मेरे

कैसे पा जाऊँ ।


~ कविता कौशिक


3.

लो सारे पुष्प 

अब हँस दो प्रभु

बोलती बाला ।


~ अमिता शाह "अमी"


4.

फैलाई बॉंहें 

दरिंदों का है डर 

रक्षा हो प्रभु ।


~ राजश्री राठी


5.

छोटी सी आशा

पूर्ण हो अभिलाषा

सृष्टि विधाता ।


~ ए.ए.लूका


6.

निश्छल मन

सर्वत्र देव देखे

स्वयं प्रकृति ।


~ शर्मिला चौहान


7.

बिटिया प्यारी

खुदा की अनुकंपा

दर्शन जारी ।


~ प्रकाश कांबले


8.

मैं तेरी मीरा

तू मेरा गिरधर

ले ले बाहों में ।


~ बन्दना गुप्ता


9.

स्वप्न की परी

रंगीन स्वप्न देखे

सितारे चुने ।


~ देवयानी बनर्जी


10.

एक सहारा

तुम ही हो किनारा

अनाथ हूँ मैं ।


~ पूनम मिश्रा पूर्णिमा


11.

ईश अर्चन

नन्हें से हस्त फूल

बिखेरे रंग ।


~ कल्पना कामदार


12.

भूत भविष्य

संवेदना का नाता

प्रेम लुटाता ।


~ अंजुलिका चावला


13.

हे मेरे दाता

विनती मेरी सुनो

सभी सुखी हों ।


~ संतोष बुद्धराजा


14.

ज्ञान विस्तार

प्रभु हो उपकार

सृष्टि उद्धार ।


~ मधु सिंघी


15.

धन कुबेर 

बेटी धन की पेटी

संरक्षण हो ।


~ मीरा जोगलेकर


16.

ईश का दर

फ़रिश्तों की दुआएँ

खाली न जाएँ ।


~ विद्या चौहान


17.

छवि तुम्हारी

मुकुटधारी भव्य

सुनो अरज ।


~ गंगा पांडेय 'भावुक'


18.

अचंभा बना

करिश्माई स्वरुप

लौकिक रुप ।


~ निर्मला सुरेंद्रन


19.

बोधी का वृक्ष

अष्टांग मार्ग ज्ञाता

आव्हान  करूँ ।


 ~ रूबी दास


20.

नन्हें से कर

उठे तो झुक गया

स्वयं अंबर ।


~ अल्पा जीतेश तन्ना


21.

रंगों में देखे

कल्पनाशील बच्ची

प्रभु की छवि ।


~ रमा वर्मा


22.

देख ईश्वर

कृपा दृष्टि से मांगे

नन्ही बिटिया ।


~ रेशम मदान


23.

कहते सभी

तू बच्चों की सुनता

कब सुनेगा ।


~ सुषमा अग्रवाल

☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆

सोमवार, 9 अगस्त 2021

हाइकु ताँका प्रवाह (चित्र आधारित कतौता सृजन प्रतियोगिता) अगस्त-2021

~ चित्र आधारित कतौता सृजन प्रतियोगिता ~

हाइकु ताँका प्रवाह

अगस्त - 2021

क्र. 16


विजयी प्रतिभागी

प्रविष्टि के 25 कतौता


चित्र

कतौता

---0---

1.

कांटो में बैठ

जीवन लक्ष्य देखें 

दूर दृष्टि रखते ।


~ रूबी दास


2.

कांटों की तार

है संकट हज़ार

कैसे हो बेड़ा पार ।


~ निर्मला पांडेय 


3.

दिखे ना डाली

हुआ बिजली तार

एक मात्र आधार ।


~ देवयानी बनर्जी


4.

जिंदगी तो है

कँटीली तारों जैसी

फिर भी चहकते ।


~ संतोष बुद्धराजा 


5.

चार चिड़िया

झुंड बनाये बैठी

चर्चा कर रही है ।


~ छाया श्रीवास्तव 


6.

थे हम पांच

लगा हैं दरबार 

उड़े छितीज पार !


~ ज्ञान भंडारी 


7.

सोच समझ

वाणी बिन बुनते

घोंसला वो सजाते ।


~ मीरा जोगलेकर 


8.

साथ कब से

जो भी उड़े पहले

बेवफ़ा कहलाए ।


~ विवेक कवीश्वर 


9.

चिड़िया चार

काँटों पर कदम

पंखों पर भरोसा ।


~ अमिता शाह "अमी"


10.

कटा दरख़्त

देख रही बहनें

उजड़े आशियानें ।


~ अल्पा जीतेश तन्ना 


11.

है एकजुट

कांटों पर विराज

अंबक अनागत ।


~ कल्पना कामदार 


12.

आज रक्षक

बन गये भक्षक 

कैसे रहूँ अक्षुण्ण ।


~ मधु सिंघी 


13.

चिड़िया होना

कितना मुश्किल है

मौन हो कर जीना  !


~ विद्या चौहान 


14.

सारे है साथ

एकता की मिसाल 

जितेंगे यें संसार ।


~ कविता कौशिक 


15.

मिलता बल

जो हम सब साथ

एकात्मता की शक्ति ।


~ सुषमा अग्रवाल 


16.

सुदृढ़ स्वस्थ

एकता बलवान

कामयाबी का लक्ष्य ।


~ राजश्री राठी 


17.

सुजान चार

लौह श्रृंखला बैठ

करें गूढ़ विचार ।


~ शर्मिला चौहान 


18.

दुनिया वालों

हम सब साथ हैं

एकता की मिसाल ।


~ पूनम मिश्रा 


19.

हवा हो गया

डर हमार आज

मिल बैठे हैं हम । 


~ प्रकाश कांबले


20.

शाखाएँ छूटी

हुआ तार बसेरा

हम साथ साथ है ।


~ शीला तापड़िया 


21.

चारों  वेद के

ज्ञाता ये कबूतर

जन्मों का बस खेल ।


~ डॉ. शीला भार्गव 


22.

एकता शक्ति  

वंश गोरैया पंक्ति 

है शिष्टाचार भक्ति ।


~ हरीश रंगवानी 


23.

कंटीले तार

ही जीवन आधार

उजड़ गया नीड़ ।


~ गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"


24.

पंछी सुंदर

प्रकृति के श्रृंगार

दिव्य नेह प्रसार ।


~ पूर्णिमा सरोज


25.

मानव सीखो

सीमा हीन गगन

बैठे मस्त मगन ।


~ रेशम मदान 

☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆

रविवार, 11 जुलाई 2021

दृश्य आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता, जुलाई-2021

दृश्य आधारित हाइकु सृजन प्रतियोगिता

हाइकु ताँका प्रवाह

(माह - जुलाई, क्र. 15)

----000----


चयनित प्रतिभागी 



प्रविष्टि के हाइकु


1.

अश्कों के मोती

झरे धरा की गोद

घटा बिटिया ।


~ अमिता शाह "अमी"


2

हथेली थाप

बरसात का स्पर्श

जल तरंग ।


~ शुचिता राठी


3.

अल्हड़ मन 

बरखा का नर्तन 

भीगे है तन ।


~ राजश्री राठी 


4.

मेघा बरसे

मोती से जल बिंदु

किसान हर्षे ।


~ निर्मला पांडेय


5.

बरसें मेघा

घर आ मोरे सैंया

तरसे जिया ।


~ बुद्धराजा 


6

इश्क की बूंदें

दरिया दिल झूमा

प्यार हो गया ।


~ पूनम मिश्रा पूर्णिमा 


7.

भीगे बदन

बारिश का मौसम 

क्यों बस हाथ ।


~ छाया श्रीवास्तव 


8.

नीर के मोती

सँजो लूँ अंजुरी में

गूँथ लूँ माला ।


~ मीरा जोगलेकर


9.

वर्षा की बूंद

यह जीवन दान

अमृत धार ।


~ मधु सिंघी 


10.

ये बारिश

बढ़ाती है तपिश

तप्त विशिष्ट ।


~ ए.ए.लूका


11.

मेघ प्रीतम

मही को पहनाते

बूँदों का हार ।


~ विद्या चौहान 


12

बूंदों के गीत

रोम- रोम रमती

तुम्हारी प्रीत ।


~ अल्पा जीतेश तन्ना 


13

बूंदो ने छेड़ा

तराना फुहार का

मीठी छुअन ।


~ शीला तापड़िया 


14.

झड़ी लगी है

मचलता सावन

हथेलियों पे ।


~ रमा प्रवीर वर्मा 


15

देख हथेली 

बरसा आकुल हो 

चीर मेघ मैं ।


~ रति चौबे 


16.

पी की छुअन

कराती एहसास

बैरी बरखा ।


~ सुषमा अग्रवाल


17.

हाथों  में मोती

समेंट लू अपने

मिलें जीवन ।


~ कविता कौशिक 


18.

बौछार पड़ी

तर्जनी-मध्यमा भी

थिरक उठे ।


~ रूबी दास


19.

स्वागत करे 

देता रस चौमासा 

बांहें फैलाए ।


~ हरीश रंगवानी 


20.

ठंडी फुहार

कृषक की गुहार

दर्द धो गई ।


~ अंजुलिका चावला 


21.

व्यर्थ न बहे

जल ही जीवन है 

आओ सहेजें ।


~ सुधा राठौर 


22.

ये रिमझिम

देती जन जीवन

मयूर मन ।


~ गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

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