हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐
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शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

हाइकुकार गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक" जी के हाइकु

हाइकुकार 

गंगा प्रसाद पाण्डेय "भावुक"

हाइकु 

पीपल छाँव
डेरा पहलवान
लाल लंगोट ।
•••

वट की छाया
पथिक को आराम
चहके पक्षी ।
•••

आँचल माँ का
ममता भरी छांव
सुख की नांव ।
•••

पिता का साया
प्रगति का सोपान
अमृत पान ।
•••

अंधेरा घना
गायब परछाई
बुरे हों कर्म ।
•••

झुकी कमर
लाठी एक सहारा
ढूंढे जवानी ।
•••

□  गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019

~ हाइकुकार गंगा प्रसाद पांडेय जी के हाइकु ~

हाइकुकार 

गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

हाइकु


एक किरण
प्रकाश की ख़ातिर
हारेगा अंध ।
●●

फैली चमक
लो हुआ जगमग
अंधेरा छुपा ।
●●

ज्योति दिये की
कायर था अंधेरा
है दिया तले ।
●●

आंखों का नूर
दिखता जग सारा
ईश का वर ।
●●

हिय प्रकाश 
आत्मा की ज्योति
ज्ञान जलाये ।
●●●

□  गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

सोमवार, 9 सितंबर 2019

हाइकुकार गंगा प्रसाद पांडेय भावुक जी के हाइकु

हाइकुकार

गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"


हाइकु 


ये अति वृष्टि
प्रकृति प्रकोपित
ढहते घर ।

उफनी नदी
दिखे न दोनों पाट
गांव ही साफ़ ।

ये रिम झिम
बूंदें कब टूटेंगी
व्याकुल पक्षी ।

दाना न मिले
बरसे सिर्फ पानी
गाय रंभाये ।

कच्चा मकान
गिर गया दालान
मरी बकरी ।

माँ की ही कृपा
सबको मिली धरा
फिर भी मारा ।

बुजुर्ग माई
खत्म हुयी दवाई
सूखी खटाई ।

माँ की इज्जत
बहू करे न बेटा
चाहें कीमत ।

माँ जैसे मरी
सब ढूढें गहना
साझे की अर्थी ।

माता की सेवा
विरले ही करते
ढूंढे न मिलें ।
~ • ~

□  गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

हाइकुकार गंगा प्रसाद पांडेय भावुक जी के हाइकु

हाइकुकार 

गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"


हाइकु 


1.
जीवन जंग
कर्मठता उमंग
तंद्रा भुजंग ।

2.
युद्ध व्यापार
जीवन मझधार
रक्त की धार ।

3.
युद्ध की ज्वाला
जलता तपोवन
जीव हवन ।

4.
शांति किरण
व्याकुल जन गण
स्वर्ण हिरण ।

5.
जग विकल
ढूंढे शांति संबल
नील कमल ।
~ • ~

□  गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

हाइकुकार गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक" जी के हाइकु

हाइकुकार

गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

{हाइकु} 

01.
सफर शुरू 
गर्भ से मृत्यु तक
अनंत यात्रा ।

02.
जीवन यात्रा 
अंध संग प्रकाश
यही  विकास ।

03.
उड़ी तितली
पीछे भागते बच्चे
रोता बालक ।

04.
आया बंदर
मचा है शोरगुल
टूटी डालियां ।

05.
बहता पानी
डूबते खलिहान
गांव में शोक ।
☆☆☆

□  गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

रविवार, 4 अगस्त 2019

हाइकुकार गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक" जी के हाइकु


हाइकुकार

गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

हाइकु 


पतनोन्मुखी
धर्म की राजनीति
मूकदर्शक ।

मरणोन्मुख
राजनीति का धर्म
मूल्यहीनता ।

मौकापरस्त
धोखे में सिद्धहस्त
जनता पस्त ।

देश पहले
यही उत्कृष्ट धर्म
धरा का कर्ज ।

घाव गहरा
माता पिता उपेक्षा
सदमा लगा ।

तपता सूर्य
निढाल मजदूर
पैरों में छाले ।

सत्य अकेला
लड़ता असत्य से
देखो तमाशा ।

सेंकते रोटी
मजहब की भट्ठी
देश के नेता ।

लंपट योग
दूध के धुले लोग
करते भोग ।

संवाद हीन
अपराध संगीन
मानव मीन ।

कथनी भिन्न
कर्म छिन्न विछिन्न
भाषायी जिन्न ।

बिकता कवि
डूबता हुआ रवि
धूमिल छवि ।

पीड़िता मृत
संबन्धी आतंकित
न्याय लंबित ।

□ गंगा प्रसाद पांडेय "भावुक"

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