हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐
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बुधवार, 29 जनवरी 2020

हाइकुकार डाॅ. विष्णु शास्त्री "सरल" जी के हाइकु

हाइकुकार 

डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"


हाइकु 
--0--

नव  बसंत 
आया  लेकर  अब 
सुख  अनंत  |

फूली  सर्षप 
धरा  - मंडप  पर 
बढ़ा आतप  |

मीठी  बयार 
दिशाएँ  मदहोश 
स्फूर्ति  अपार  |

धरा  सजेगी 
कर  नया  श्रृंगार 
नई  बहार  |

बदला  रंग 
प्रकृति  ललना  का
नई  उमंग  |

शिष्ट  -  विशिष्ट 
अवसर  है  आया 
कटा  अरिष्ट  |

हर्ष  ही  हर्ष 
सर्वत्र   प्रत्येक  का 
होगा  उत्कर्ष  |

□  डाॅ. विष्णु शास्त्री  "सरल" 
चम्पावत  (उत्तराखंड  )

सोमवार, 4 नवंबर 2019

~हाइकुकार डाॅ. विष्णु शास्त्री "सरल" जी के हाइकु ~

हाइकुकार 

डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

हाइकु


गीतोपदेश 
जीवन  के  विधान
बने  अशेष  |

वेदों  का सार 
हैं उपनिषदों  के 
शुभ  विचार |

गीता  त्रिवेणी 
ज्ञान - भक्ति - कर्म  की
जग- मर्म  की |

गूढ- गम्भीर 
है  गीता  का आशय 
सूक्ष्म  विषय |

गीता- निहित
ज्ञान  का दिव्य  कोष 
देता  संतोष |

पढें  गीता  का 
चाहे  एक  ही श्लोक 
पाएँ  आलोक |

गीता  आश्रय 
तीनों  लोकों  के  प्राणी 
होते  निर्भय |

□  डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

रविवार, 15 सितंबर 2019

हाइकुकार डाॅ. विष्णु शास्त्री "सरल" जी के हाइकु

हाइकुकार

डाॅ. विष्णु शास्त्री "सरल"


हाइकु 


1.
वन प्रदेश
वृक्ष गुल्म लताएँ 
शांति विशेष ।

2.
हरी चादर
बिछी है हर ओर
धरती पर ।

3.
मधुर स्वर
विभिन्न पक्षियों का
अति सुंदर ।

4.
निकट आते
स्वतः ही वनमृग 
स्नेह दर्शाते ।

5.
मेल-मिलाप
है आत्मानुशासन 
सब निष्पाप ।

6.
बेरोकटोक 
सदा आवागमन 
अमरलोक ।

7.
जंगली फल
रंग-बिरंगे फूल
विमल जल ।

8.
भीनी सुगंध 
तरोताजा करती
दुख हरती ।

9.
प्रकृति परी
नाचती हर पल
सदा निश्छल ।

10.
प्रभु की सत्ता 
सर्वत्र विद्यमान 
नहीं इयत्ता ।
~ • ~

□   डाॅ. विष्णु शास्त्री "सरल"
सिद्धायन, भैरवाँ, चम्पावत - 262523
(उत्तराखण्ड)

रविवार, 1 सितंबर 2019

हाइकुकार डॉ. विष्णु शास्त्री सरल जी के हाइकु

हाइकुकार 


डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

हाइकु 


01.
बादल फटा
अचानक तबाही 
संपर्क कटा ।

02.
कटे पहाड़ 
हुआ वृक्षोन्मूलन 
खेत उजाड़ ।

03.
सोचें विचारें
प्रकृति को बचाएँ 
सुफल पाएँ ।

~ ◇ ~

□  डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल" 
सिद्धायन ,भैरवाँ, चंपावत
पिन - 262523 [उत्तराखण्ड]

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

हाइकुकार डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल" जी के हाइकु

हाइकुकार

डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

हाइकु 


1)
सूर्य निकला
पूर्वी आसमान से 
अँधेरा टला ।

2)
चाँद निस्तेज 
सूर्य का हुआ जब
प्रकाश तेज ।

3)
मंगलगीत 
खगकुल ने गाया
स्वर विनीत ।

4)
सोना बिखरा
लगा भूमण्डल का
रूप निखरा ।

5)
बयार चली
है सुरभि बाँटने
मुहल्ले गली ।
~ • ~

□  डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

"सिद्धायन" भैरवाँ, चम्पावत

पिन - 262523 (उत्तराखण्ड)

बुधवार, 14 अगस्त 2019

हाइकुकार डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल" जी के हाइकु

हाइकुकार

डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

हाइकु 


निर्मलतम
धरा और आकाश 
कार्तिक मास ।

संक्रांति काल 
ऋतु-मौसम नया 
बदली चाल ।

अति पावन 
हँसमुख सुबह
मनभावन ।

सुखद स्पर्श 
पुलकित करता
ताप हरता ।

दिव्य दर्शन 
देता हिमनिधान
चिर महान ।

मंगल गीत
गाते हैं दिग दिगंत
बढ़ती प्रीत ।

शीतल वायु
फेरी देने लगी है
धूप अल्पायु ।

टिमटिमाते 
सांध्यवेला में तारे
दिखते न्यारे ।

त्यौहार आया
झिलमिलाते दीप 
खुशियाँ लाया ।
●●●

□ डॉ. विष्णु शास्त्री "सरल"

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