हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐
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रविवार, 16 मई 2021

~ हाइकु कवयित्री स्वाति गुप्ता "नीरव" जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

स्वाति गुप्ता "नीरव"

हाइकु

--0--


मिट्टी का घर

तपती दोपहर

शीतल मन ।


शीतल धरा

गर्मी की तपिश को

खुद समाये ।


शीतल धरा

देती बिछोना बन

सुकूं के नींद ।


तूफानी रात

बचा दे हे मालिक

तृण घरोंदा ।


नदी का तट

देख तैरते लाश

हृदय शूल ।


नीला आकाश

अदृश्यता है वास

जीवन आश ।


अंतर्मन में

सिर्फ आकाश तत्व 

जीवंत रखे ।


आम्र दरख़्त

फलों से लदी डाली

धरा को चूमे ।

---00---


□  स्वाति गुप्ता "नीरव"

रविवार, 25 अगस्त 2019

हाइकु कवयित्री स्वाति गुप्ता "नीरव" जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

स्वाति गुप्ता "नीरव"

हाइकु

मां की रसोई
पाक में बरकत
कुटुंब तृप्त ।

माँ का वात्सल्य
सचमुच जन्नत 
दूध की धारा ।

शिशु अघाय
सुखद अनुभूति
माता हर्षित ।

छोक में गीत
लगे गुनगुनाने
समुचा घर ।

माता का रूप
शक्ति और शीलता
प्रभु की देन ।

माँ से मायका
घर स्नेह से भरा
बेटी प्रसन्न ।
~ • ~

□  स्वाति गुप्ता "नीरव"

रविवार, 11 अगस्त 2019

हाइकु कवयित्री स्वाति गुप्ता "नीरव" जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

स्वाति गुप्ता "नीरव"


हाइकु 


देख जलद
मेंढक हैं टर्राये
बरखा आये ।
•••

बरसे पानी
सूखी धरा महकी
सौंधी खुशबू ।
•••

बारिश आए
पैजन सम बाजे 
झिंगुर बोले ।
•••

खेत की डोली
कतार में बालाएँ
रोपा लगाएँ ।
•••

स्वाति नक्षत्र
बूंद की वह प्यासी
चातक पंछी ।
•••

जल शैलाब
बेबस बहे  प्राणी
प्रकृति कोप ।
•••

पानी बरसा
पौधों में आई जान 
मुस्काई धरा ।
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□  स्वाति गुप्ता "नीरव"

गुरुवार, 8 अगस्त 2019

हाइकु कवयित्री स्वाति गुप्ता "नीरव" जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

स्वाति गुप्ता "नीरव"

हाइकु 


1
त्रिलोक धारी
करें सर्व कल्याण
शिव पालक ।

2
गौरी के पति
हलाहल धारक
देव रक्षक । 

3
सावन आये 
मन तुझको ढूंढे
तीज परब ।
     
 4
     बूंदों ने छेड़ा    
        टुटे साँसों के तार        
  दिल धड़का ।  

5
बरसे मेघ 
टूट गया घरौंदा
ढूंढूँ तिनका ।

6
कोयल कूके
आम्र दरख्त झूला
मन चहके
~•~

□ स्वाति गुप्ता "नीरव"

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