हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐

सोमवार, 20 जनवरी 2020

~ हाइकु कवयित्री सुधा शर्मा जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

सुधा शर्मा 

हाइकु 

हवा कहती
आया है रितुराज
कलियाँ खिली ।

पीताभ धरा 
नवल चुनरिया
लपेट तन ।

बंसत दूत
अमरइया डाल
कुहुक करे ।

पलाशी मन
जग रही उमंग 
जागी तरंग ।

मदिर लगी
वासंती पुरवाई 
मन बौराई ।

अलि गुंजन
इठलाती कलियाँ 
पँखुरी फैले ।

अमरईया 
कनक कण सजे
रसाल फूल ।

गेंदिया धूप
पसारकर बाहें 
खिलखिलाती ।

कण कण है 
नव जीवन पाया
वसंत आया ।

अनंग तीर
बिंधते है हृदय
मौसम हँसा ।

□  सुधा शर्मा 
राजिम, (छत्तीसगढ़)

हाइकु कवयित्री मंजू सरावगी "मंजरी" जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री
मंजू सरावगी "मंजरी"

हाइकु

सरसों फूली
धरा करें श्रृंगार
आया बसंत ।

आम बौराया
कोयल कुहुकती
बंसत ऋतु ।

पलाश खिले
यौवन दहकता
धरा बेहाल ।

चाँद बहका
देख धरा यौवन
बाहों में लेने ।

चाँदनी रात
यौवन बहकता
चाँद के साथ ।

जग की रीत
भेड़ चाल चलती
सही गलत ?


नाऊ बारात 
सब सजे तैयार
टीपारा कौन ।

ऋतु सुहानी
पुरवाई मस्तानी
धरा हो जवाँ ।

पीली चूनर
धरती इठलाती
पिया के संग ।

काजल टीका
कोयले को नजर
कैसे बचाये ।

चक्र चलता
मौसम बदलते
ऋतु कहते ।

आवागमन
सुख दुःख का चले
काल के साथ ।

चाँद सूरज
समय का पहिया
एक ही दिशा ।

□ मंजू सरावगी "मंजरी"
रायपुर, (छतीसगढ़)

रविवार, 19 जनवरी 2020

~ हाइकु कवयित्री आरती बंसल जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

आरती बंसल 


हाइकु 
--0--

1.
चाही थी बस
अंजुरी भर धूप
नीली हरी सी ।
---0---

2.
जाड़े की धूप
कानों को गरमाती
मखमली सी ।
---0---

3.
टिका के पीठ
आ बैठती है धूप
छज्जे की ओट ।
---0---

4.
सागर तट
लहरों का बिछौना
पहली धूप ।
---0---

5.
धूप सुहानी
बादल की रूई से
बुनती तार ।
---0---

□ आरती बंसल

शनिवार, 18 जनवरी 2020

हाइकुकार परिचय : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"


        === प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ===
       प्रदीप कुमार दाश "दीपक" (जन्म : 10 अगस्त 1979) हिन्दी [[हाइकु]], [[ताँका]], [[चोका]], [[सेदोका]] व [[रेंगा विधा]] के रचनाकार हैं ।<ref>https://hindi.sahityapedia.com/user/pradeepkumardash?cat=33</ref> शताधिक विषयों पर इनके अनगिनत हाइकु '''स्वर्गविभा''' [http://www.swargvibha.in/haiku/haiku_writers/pkdas.html] में तथा कई कृतियों में निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं । छत्तीसगढ़ के शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रजपुरी, जिला- सरगुजा में हिन्दी व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं ।

== जीवन ==

== मौलिक कृतियाँ ==

● मइनसे के पीरा ([[छत्तीसगढ़ी]] का प्रथम हाइकु संग्रह), प्रकाशन वर्ष- 2000 <ref>http://kavitakosh.org/kk/otherapps/ebooks/?b=1uAa3GcecKGWMOI7pE6Pi5IIwaGXDBwjZ</ref> ● हाइकु चतुष्क (हाइकु संग्रह), प्रकाशन वर्ष- 2000 <ref>http://hastaksher.com/rachnakar.php?rid=382</ref> ● संवेदनाओं के पदचिह्न (काव्य संग्रह), प्रकाशन वर्ष - 2001 ● रूढ़ियों का आकाश (हिन्दी का प्रथम सेन्-रियू संग्रह [http://www.swargvibha.in/pustak%20samiksha/all_pustak_samiksha/aakash.html]), प्रकाशन वर्ष- 2003 [http://kavitakosh.org/kk/otherapps/ebooks/?b=0B4Y8h_F9o-nVWEVQdFh6UThaZjNxeVMzaDhIQ1VfWGNxTkFj] ● प्रकृति की गोद में (हाइकु संग्रह), प्रकाशन वर्ष- 2017 [https://www.surtacg.com/pustak-samiksha-prkrti-ki-god-men/] ● परछाइयाँ (भारत की सत्रह भाषा व सात बोलियों में अनूदित हाइकु संग्रह), प्रकाशन वर्ष- 2018 [https://www.surtacg.com/pustak-samiksha-parchhaiya/] ● काशतण्डीर हस (उड़िया हाइकु संग्रह), प्रकाशन वर्ष- 2019 ● अंतर्मन की हूक (सेदोका संग्रह), प्रकाशन वर्ष- 2019

== अनूदित कृतियाँ ==

● वंदेमातरम् (उपन्यास) उड़िया से हिन्दी, प्रकाशन वर्ष- 2018

== सम्पादित कृतियाँ ==

● '''हाइकु वाटिका''' (हाइकु संकलन) प्रकाशन वर्ष- 2004 [http://kavitakosh.org/kk/otherapps/ebooks/?b=0B4Y8h_F9o-nVWEVQdFh6UThaZjNxeVMzaDhIQ1VfWGNxTkFj] ● '''हाइकु सप्तक''' (हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ सात हाइकुकारों के हाइकु, परिचय व विचार) प्रकाशन वर्ष- 2006 <ref> हाइकु-काव्य विश्वकोश, (संपादक-डॉ. भगवतशरण अग्रवाल, हाइकु भारती प्रकाशन अहमदाबाद, प्रकाशन वर्ष- 2009, पृष्ठ क्र. 41 व 152 </ref> ● ''' झाँकता चाँद ''' (हाइकु संकलन) प्रकाशन वर्ष- 2017 [https://www.surtacg.com/pustak-samisha-jhankta-chand/] ● ''' कस्तूरी की तलाश ''' (विश्व का प्रथम रेंगा संग्रह) प्रकाशन वर्ष- 2017 [https://www.surtacg.com/pustak-ki-talash-kasturi-ki-talash/] ● ''' ताँका की महक ''' (ताँका संग्रह) प्रकाशन वर्ष- 2017 [http://www.swargvibha.in/forums/viewtopic.php?f=14&t=67547&p=117946&sid=bba711db89443b5aeb31f5110da2a963#p117946] ● ''' हाइकु मञ्जूषा ''' (समसामयिक हाइकु संचयनिका) प्रकाशन वर्ष- 2018 [http://utkarshprakashan.in/details.php?bid=369] ● ''' [[छत्तीसगढ़]] की हाइकु साधना ''' (साझा हाइकु संग्रह) प्रकाशन वर्ष- 2018 [https://books.google.co.in/books?id=v0FaDwAAQBAJ&pg=PA222&lpg=PA222&dq=%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE&source=bl&ots=WCI9V4YCkn&sig=ACfU3U042m5tEKJX0fA1sZMFsZF91KuT1w&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwiw5oncjcHmAhWOWX0KHRBRA8sQ6AEwAnoECAkQAQ#v=onepage&q=%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE&f=false] ● ''' चारु चिन्मय चोका ''' (साझा चोका संग्रह) प्रकाशन वर्ष- 2018

== सम्मान ==

(1) राष्ट्रभाषा रत्न सम्मान- 1997 (2) राष्ट्रभाषा आचार्य  सम्मान  - 2000 (3) धन्नाजी नाना चौधरी पुरस्कार - 2001 (4) रवीन्द्रनाथ टैगोर लेखक पुरस्कार- 2003 (5) अंबेडकर फैलोशिप सम्मान -2004 (6) हिन्दी सेवी सम्मान- 2015 (7) श्रेष्ठ युवा रचनाकार सम्मान- 2016 (8) फर्स्ट इण्डो जापान पोयट्री वेन्चर अवार्ड - 2017 [https://indiabookofrecords.in/first-indo-japan-poetry-venture/] (9) हाइकु द्रोण सम्मान- 2017 (10) मात्सुओ बासो शब्द शिल्पी सम्मान- 2017 (11) श्रेष्ठ सम्पादक रत्न सम्मान- 2017 (12) साहित्य के दमकते दीप सम्मान-2017 (13) बाबु बालमुकुंद गुप्त हिन्दी साहित्य सम्मान- 2017 (14) साहित्य रत्न सम्मान- 2018 (15) साहित्य अभ्युदय सम्मान- 2018 (16) सर्वभाषा सम्मान- 2018 (17) छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान- 2018 (18) साहित्य मार्तण्ड सम्मान- 2018 (19) निर्मला स्मृति अनुवाद साहित्य सम्मान- 2019 (20) साहित्य गौरव सम्मान- 2019 (21) साहित्य रत्न सम्मान- 2019 (22) शताब्दी सम्मान : बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रदत्त- 2019

== बाहरी कड़ियाँ ==

[http://haikumanjusha.blogspot.com हाइकु मञ्जूषा ब्लॉग]

== सन्दर्भ ==

{{हिन्दी हाइकु}}

[[श्रेणी : हिन्दी हाइकुकार]]

~•~ हाइकुकार ऋतुराज दवे जी के हाइकु ~•~

हाइकुकार

ऋतुराज दवे 


हाइकु 
--0--

(1)
जाड़े में खूब 
आँगन खेल रही 
सुहानी धूप ।
--0--

(2)
दवाई बड़ी 
आँगन की तुलसी 
ममता खड़ी ।
--0--

(3)
गोद में लेटा 
आँगन भी रो रहा 
शहीद आया ।
--0--

(4)
बड़े शहर 
खो रहे  हैं आँगन 
सिमटे घर ।
--0--

(5)
आशीष धूप 
वसुंधरा आँगन 
खिलते फूल ।
--0--

(6)
चुनती दाना 
आँगन झूमें चिड़ी 
गा रही गाना ।
---0---

□  ऋतुराज दवे

~ हाइकु कवयित्री रेखा रविदत्त जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

रेखा रविदत्त 


हाइकु 
--0--

1.
हर्ष उल्लास
है मन उत्साहित
अमृत तुल्य ।
--0--

2.
राधा का प्यार
कृष्ण का है उल्लास
जीवन सार ।
--0--

3.
पूर्ण उल्लास
करे भीतर वास
खिले कपास ।
--0--

4.
पौत्र का रूप
हो उल्लास की स्मृति
थामे अंगुली ।
--0--

5.
मेघ बरसे
नाचे मन मयूर
सौंधी सुगंध ।
--0--

6.
फूल गुलाब
उपहार प्रेम का
फैले सुगंध ।
--0--

7.
बातें सुगंध
बगल में कटार
शब्दों का चारा ।
--0--

8.
वाणी विराम
ज्ञानी की पहचान
सुख हजार ।
--0--

9 .
हासिल ज्ञान
दुखों पर विराम
मान सम्मान ।
--0--

10.
जीवन धारा
सुख-दुख का ज्ञान
मृत्यु विराम ।
--0--

11.
गाँव विरान
शहर को भागती
आज की पीढ़ी ।
--0--

12.
भागम भाग
शहर की जिंदगी
पलती आस ।
--0--

13.
दूषित हवा
शहरी यातायात
भवन ऊँचे ।
--0--

14.
शहरी शिक्षा
आधुनिक डगर
मिले उन्नति ।
--0--

15.
दिल सहमा
दर्दनाक घटना
बहती आँखें ।
--0--

16.
मिलते नैन
सपने सजाती 
घटना प्यारी ।
--0--

17.
दुख बादल
बिजली सी घटना
जले जीवन ।
--0--

18.
इच्छा भँवरे
जीवन मधुबन
सपने फूल ।
---0---

□  रेखा रविदत्त

हाइकुकार मनीष कुमार श्रीवास्तव जी के हाइकु

हाइकुकार

मनीष कुमार श्रीवास्तव 


हाइकु
--0--

(1)
आँगन मध्य
मंडप सुसज्जित
मंगल गीत ।
--0--

(2)
कला रंगोली
आँगन की सहेली
हँसी ठिठोली ।
--0--

(3)
आँगन बीच
तुलसी का विरवा
हवा पुरवा ।
--0--

(4)
घी का दीपक
तुलसी चौरा पर
आँगन इत्र ।
--0--

(5)
आँगन मध्य
माँ ने बिखेरा दाना
चिड़िया खाना ।
--0--

(6)
आभा कुन्दन
आँगन में छिटकी
प्राची में सूर्य ।
--0--

(7)
रेडियो चर्चा
सहेलियों के संग
आँगन गांव ।
---0---

□ मनीष कुमार श्रीवास्तव

हाइकुकार शम्भू सिंह रघुवंशी "अजेय" जी के हाइकु

हाइकुकार 

शम्भू सिंह रघुवंशी "अजेय" 


हाइकु
--0--

1.
मासूम कली
सदा दबी मसली
 फिर भी फली ।

2.
कलिका चली
भगवान को भली
पीढियां जलीं ।

3.
सुमन कली
पाशविकता खली
सरिता गली ।

4.
मै रामकली
उदर में मचली
आई धवली ।

5.
फुलबगिया
परिवार कलिका
अश्रुछलिका ।

6.
तट हमारा
ढूंढते पतवार
तुम्हारे द्वार ।

7.
नदी किनारे
संगम इतराएं
गंगा नहाते ।

8.
देखते कूल
समय प्रतिकूल
जीवन धन ।

9.
जीव विकट
असमंजस तट
ये मरघट ।

10.
दूर किनारा
अखिलेश सहारा
फिरता मारा ।
---0---

□ शम्भू सिंह रघुवंशी "अजेय"
 गुना (मध्यप्रदेश)

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

हाइकु कवयित्री रजनी गुप्ता "पूनम" जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 
रजनी गुप्ता "पूनम"

हाइकु
--0--

वर्षा ठहर
सर्द बड़ी सहर
ढाती कहर ।

करूँ गुजर
मुश्किल में सफर
आठों पहर ।

काँपते गात
बढ़ती बरसात
डराती रात ।

पानी बरसे
निकलती घर से
पेट तरसे ।

नन्हें बालक
मिलता ना पालक
कटे चालक ।

अबला नारी
क्षुधा सबसे भारी
बड़ी लाचारी ।
--0--

□ रजनी गुप्ता "पूनम"
लखनऊ (उ.प्र.)

~•~ हाइकुकार ओम हरित जी के हाइकु ~•~

हाइकुकार 

ओम हरित 


हाइकु 
--0--

ताल तलैया 
सूखे जाने कब सें 
दुःखी मछली ॥ 
---0---

ओस कोहरा 
कपकपाता तन 
सर्द मौसम ॥ 
---0---

पत्ते गिरते 
देख उदास मन 
संध्या काल में ॥
---0---

देख शिकारी 
मुश्किल चिड़ियों का 
चहचहाना ॥
---0---

छिना  हैं चैन 
लहराती लटों ने 
बेकल जिया ॥ 
---0---

फूल झरते 
मुस्कान तुम्हारी 
बेहोश हम ॥
---0---

बुझता दिया 
यादों की ताजा हवा 
आ जाओ पिया ॥
---0---

□ ओम हरित

ग्राम/पत्रालय - फागी, जिला - जयपुर

~ हाइकुकार मनोज कुमार "मंजू" जी के हाइकु ~

हाइकुकार 

मनोज कुमार "मंजू"


हाइकु 
--0--

01.
आशायें मन
चुभती खलती सी
जीवन भर । 
---0---

02.
क्षणिक नहीं
संघर्ष उम्र भर
फलता तभी । 
---0---

03.
मिल जाते हैं
पथ पर साथी भी
चल पड़ते । 
---0---

04.
बुझते दिए
पसीने से जलते
झिलमिल से । 
---0---

05.
फिर क्यों हारे
पाना जब मंजिल
चलता रह ।
---0---

□ मनोज कुमार  "मंजू"

बुधवार, 15 जनवरी 2020

हाइकु कवयित्री सुधा राठौर जी द्वारा रचित संक्रांति पर्व के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

सुधा राठौर 


संक्रांति पर्व के हाइकु 
1.
मकर रेखा 
छूने चला है रवि
है संक्रमण ।
••!!••

2.
रवि औ' शनि
होगा स्नेह मिलन
पिता-पुत्र हैं ।
••!!••

3.
दिशा बदली
उत्तरायण सूर्य
शुभ गोचर ।
••!!••

4.
सूर्य को अर्घ्य
पावन माघ स्नान
दान महात्म्य ।
••!!••

5.
तिल सा स्निग्ध
गुड़ सी हो मिठास 
पर्व - संदेश ।
••!!••

6.
कर्म पतंग
बंधी हौसला डोर
छूना है नभ ।
••!!••

7.
नयी फसल
हर्षित हैं कृषक
धरा निहाल ।
••!!••

8.
शीत हवाएँ
हो रहीं पराभूत
सूर्य प्रखर  
••!!••

9.
बढ़ने लगी
दिवस की अवधि
रतियाँ छोटी ।
••!!••

10.
उर्जा- संचार
जागी नवचेतना
हर्ष अपार ।
••!!••

सुधा राठौर
१५-१-२०२०

शनिवार, 11 जनवरी 2020

~ हाइकु कवयित्री अंजु गुप्ता जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

अंजु गुप्ता 


हाइकु 
--0--

हैरान धरा
उगाई थीं फसलें
मकान उगा !
--0--

प्रकृति सम 
आधुनिक मानव  
बदले रंग ।
--0--

लकीरें मेरी
हैं विधाता ने लिखीं
बदलूंगी मैं !
--0--

नन्ही वो कली
शायद ही मुस्काये
थी रौंदी गयी !
--0--

छायी बदरी
व्याकुल फिर मन
गीला तकिया !
--0--

जर्जर काया
इच्छाएँ खंडहर
जीने को मरे ।
--0--

मन का लावा 
ज्वालामुखी के सम 
फट ही गया !
--0--

क्रोधित घन 
बिजरी भी गरजी
प्रलय आया !
--0--

□  अंजु गुप्ता

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

हाइकु कवयित्री डॉ. विभा रंजन जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

डाॅ. विभा रंजन "कनक"


हाइकु

--0--


१.
सूर्य किरणें
छनकर हैं आती
बादलों बीच ।
--0--

२.
ठंडी हवायें
तन छुकर जाये
सर्दी जगाये ।
--0--

३.
पूरी धरती
सफेद है दिखती
बर्फ बिखरी ।
--0--

४.
उजली धूप
सुनहरी किरणें
मन को भायें ।
--0--

५.
ओस की बूंदें
कोमल पत्तों पर
खिलखिलायें ।
--0--

६.
पेडों पे पंछी
उनके मीठे स्वर
मन लुभायें ।
--0--

७.
ऊंचे पहाड़
बरफ से हैं ढके
लगे सुंंदर ।
--0--

८.
नन्हा बादल
घुमता है आवारा
बरसूँ अब ।
--0--

९.
ठंडी सुबह
बह रही बयार
मेघ बरसे ।
--0--

१०
यह प्रकृति
देती है भरपूर
आदर करो !
--0--

□ डॉ. विभा रजंन "कनक"
नई दिल्ली 

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