हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका)

卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ हाइकु मञ्जूषा (समसामयिक हाइकु संचयनिका) संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐 ~•~ 卐

रविवार, 16 मई 2021

~ हाइकु कवयित्री स्वाति गुप्ता "नीरव" जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

स्वाति गुप्ता "नीरव"

हाइकु

--0--


मिट्टी का घर

तपती दोपहर

शीतल मन ।


शीतल धरा

गर्मी की तपिश को

खुद समाये ।


शीतल धरा

देती बिछोना बन

सुकूं के नींद ।


तूफानी रात

बचा दे हे मालिक

तृण घरोंदा ।


नदी का तट

देख तैरते लाश

हृदय शूल ।


नीला आकाश

अदृश्यता है वास

जीवन आश ।


अंतर्मन में

सिर्फ आकाश तत्व 

जीवंत रखे ।


आम्र दरख़्त

फलों से लदी डाली

धरा को चूमे ।

---00---


□  स्वाति गुप्ता "नीरव"

शनिवार, 15 मई 2021

~•~ हाइकु कवयित्री सन्तोष खन्ना जी के हाइकु ~•~

हाइकु कवयित्री 

सन्तोष खन्ना 


हाइकु
--0--


1)

गुलाब जो है

सुगंध बिखेरता

सभी के लिये ।


2)

मौत का सत्य

शरीर है नश्वर

आत्मा अमर ।


3)

माने न मन

जाना है एक दिन

कैसे हैं हम ।


4)

मन की गांठे

जब पड़ती जाती

नहीं खुलती ।


5)

लगती प्यारी

खेतों खड़ी फसल

श्रम है भारी ।


6)

मंत्र एकता

सिर चढ़ा दूराव

डूबेगी नाव ।


7)

भारत मेरा 

उदात्त हो कविता

प्राची सविता ।


8)

विश्वास ह्रास

रिसता टूटा घट

प्यास से त्रास ।


9)

भाव‌ साकार

जिजीविषा आधार

खुशी अपार ।


10)

अक्षर शिव

अर्थ शक्ति माँ गौरी

मानव लोरी ।


11)

तनाव जमा

चेहरों की चौखट

बिके बेमोल ।


12)

लगी है होड़

बने गाँव शहर

पीने ज़हर ।


13)

जल जरुरी

मिले साथ पवन 

सबको अन्न ।


14)

भागा अंधेरा

जब सूर्य ने घेरा

फैला प्रकाश ।


15)

छवि निहार

हुआ सूर्य निहाल

खुश तालाब ।


16)

कैक्टस उगा

खिले फूल को चुभा

फूल न झुका।

---00---


□  सन्तोष खन्ना

~ हाइकु कवयित्री पुष्पा सिंह "प्रेरणा" जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

पुष्पा सिंह "प्रेरणा"


हाइकु 

--0--


कैदी सूरज

कोहरे की गिरफ्त

इंद्र भी रुष्ट ।


मेघ गर्जन

प्रसव वेदना से

रंभाती गाय।


मात-पिता को

भेजा वृद्धाश्रम में

कुलभूषण ।


लौटा सपूत

तिरंगे में लिपटा

पथराई माँ ।


चाँद की ओर

बढ़ता रवि अस्त

उदास निशा ।


स्याह बादल

बरसात में धुला

उजला हुआ ।


शोर मचाया

पाँवों की बेड़ियों ने

मर्यादा टूटी ।


होठों की हँसी

आँखों में गुम हुई

टूटे सपने ।


बन्द लिफ़ाफ़ा

अधरों का चुम्बन

शब्द मुस्काए ।


रुष्ट प्रकृति

मानव हतप्रभ

कर्म का फल ।


प्रेम शाश्वत

मवेशी पीते पानी

एक घाट में ।


मृग शावक

आखेट के पश्चात

समूह भोज ।


रंगपंचमी

बरसात की बूंदे

धुला सिंदूर ।


कटी टहनी

झाँकते हरे पत्ते

नवजीवन ।


नयन नीर

होठों पर मुस्कान

यही जिंदगी ।


सितारे टँके

अम्बर की चुनरी

ओढ़े रजनी ।


हिमस्खलन

पहाड़ों पे कफ़न

विक्षिप्त नदी !


कीमत बढ़ी

पेट में लगी आग

ठंडी रसोई !


धूप में खड़े

तपते तरुवर

देते हैं छाँव ।

---00---


□  पुष्पा सिंह "प्रेरणा"

हाइकु कवयित्री कुसुम पंत "उत्साही" जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

कुसुम पंत "उत्साही"


हाइकु 

--0--


1)

नैन आधार

गुप चुप सी बातें 

पिया का प्यार ।


2)

माता ईश्वर 

ममता घर घर 

सहती कष्ट ।


3)

प्यारे गुब्बारे 

कित्ते सुन्दर प्यारे 

नभ निहारे ।


4)

भावो के रंग 

हृदय के गुब्बारे 

रिश्ते सुधारे ।


5)

पर्व  लोहड़ी 

क्रोध का है हवन 

ख़ुशी रेवड़ी ।


6)

लोहड़ी  ख़ुशी 

ढोल नगाड़े बजे 

प्रकृति हँसी ।


7)

लोहड़ी यज्ञ 

दम्भ की लकड़ियाँ 

ख़ुशी प्रसाद ।

---00---


□ कुसुम पंत "उत्साही"

देहरादून (उत्तराखंड)

~ हाइकुकार डॉ. ललित फरक्या "पार्थ" जी के हाइकु ~

हाइकुकार

डॉ. ललित फरक्या "पार्थ"


हाइकु 

--0--


1)

माँ की ममता

होती है अनमोल

कर ना तौल ।


2)

कैसा कहर ?

साँसें जाती ठहर

घुला जहर ।


3)

है मजबूरी 

आओ बना लें दूरी

साँस ज़रुरी ।


4)

व्यथित मन

फैल रहा रुदन

त्रस्त जीवन ।


5)

गमों से फैली 

आँसुओं की चाशनी

ख़ुशी काफूर ।


6)

बहती हवा

है जो पुरवाई 

लगे सुहानी ।


7)

ढलती सांझ

पंछी लौटे बसेरा

मिला सुकून ।


8)

झरे झरने

कल कल करते

बहता आब ।


9)

नेह का भ्रम

दृष्टि हो गई कम

क्या करें हम ?


10)

अटल सत्य 

वो आनंद के पल

देंगे सुफल ।

---00---


□ डॉ. ललित फरक्या "पार्थ"

~•~ हाइकुकार डॉ. सागर खादीवाला जी के हाइकु ~•~

हाइकुकार 

डाॅ. सागर खादीवाला 


हाइकु 

--0--


1)

बारिश आई

फिर भी नहीं आई

लंबी जुदाई ।


2)

चाँद निकला

रात ने आह भरी

इसी ने छला ।


3)

रुबरू मैं था 

आईना भी मेरा था 

अक्स तेरा था ।


4)

प्यास का मारा

सागर में जा डूबा 

सूर्य बेचारा ।


5)

क्या होती है माँ 

जब तक जानते

जा चुकी थी माँ ।


6)

हल्दी जो चढ़ी

एकाएक हो गयी 

छुटकी बड़ी ।


7)

माँ का आँचल 

ममता बरसाया 

भीगा बादल ।


8)

धागा टूटा था

कठपुतली गिरी 

भाग्य फूटा था ।


9)

दोस्त अच्छे थे

तमाम टूट गये

कान कच्चे थे ।


10)

सन्नाटा छाया

जंगल में शायद

आदमी आया ।

---00---


□  डाॅ. सागर खादीवाला

सीताबर्डी, नागपुर (महाराष्ट्र)

शुक्रवार, 14 मई 2021

~•~ हाइकु कवयित्री नीलू मेहरा जी के हाइकु ~•~

हाइकु कवयित्री 

नीलू मेहरा 


हाइकु 

--0--


पुष्प 


1.

रजनीगंधा

रात्रि पर्यंत इत्र

रास मिलन ।


2.

हरसिंगार

सजनी का श्रृंगार

प्रेम आभार ।


3.

अमलतास

लटकते झुमके

पीत रंगत ।


4.

अति विशुद्ध

केसर की बगिया

आज हँसती ।


5.

सूरजमुखी

दिवाकर की लाली

स्वर्णिम आभा ।


6.

गूंथता गया

नायिका की बेणी

बेला सुगंधि ।


7.

गुलाब खिला

वेधित है शूलों से

हँसे सर्वदा ।


8.

फूलों सी हँसी

सुरभित  मलय

भ्रमर-राग ।


9.

ओस मिलन

पुष्प चमके मोती

खिले चमन ।


10.

शशांक मेरा

चम चम चमके

खिले गुलाब ।


11.

प्रेमिल राग

सुमन मकरंद

प्रेम पराग ।


12.

चढ़ते पुष्प

देव, मजार, चर्च

फैली सुगंधि ।


13.

युगल प्रेमी

जयमाल श्रृंगार

शुभ प्रहर ।


14.

सुहाग बेला

पुष्पों की सेज पर

चिर प्रणय ।


15.

सौभाग्यशाली

शहीदों की राहों में

हर्षित पुष्प ।


16.

पुष्प अर्पित

जीवन समर्पित

प्रेम पुजारी ।


17.

नन्हें श्रमिक

मुरझाए  रहते

झड़ते पुष्प ।

---00---


□  नीलू मेहरा

हाइकु कवयित्री स्व. डॉ. करुणा उमरे जी के हाइकु

हाइकु कवयित्री 

स्व. डॉ. करुणा उमरे 

हाइकु 

--0--


1)

समय साथ

खो गया यहीं कहीं 

खुद के पास ।


2)

जल तरंगें 

अनुसरण करतीं 

मन उमंगें ।


3)

फूल सी हवा

भीतर खोजती हूँ 

सुबह शाम ।


4)

चाँद छवि में 

देखी तस्वीर तेरी

ये आँख मेरी ।


5)

मौसम आए

आँखों की पुतली में 

गुलाब छाए ।


6)

रंग सिन्दूर 

चुनरिया के रंग

पिया का नूर ।


7)

साँझ शेष है

अभी भय जिंदा है 

राशि मेष है ।


8)

पल में रेत

ढहे घरौंदा जब

देता है खेद ।


9)

जिंदा है पत्ता 

पुकार रही कुर्सी 

नेता की सत्ता ।


10)

धर्म नहीं है

समय को गिनना

किंतु तौलना ।


11)

सखा वसंत 

मन कुहासा छँटा 

दुखों का अंत । 

---00---


□ डाॅ. करुणा उमरे 

जयप्रकाश नगर, नागपुर 

(महाराष्ट्र)

गुरुवार, 13 मई 2021

~•~ हाइकु कवयित्री शुचिता राठी जी के हाइकु ~•~

हाइकु कवयित्री 

शुचिता राठी 


हाइकु 

--0--


1)

रश्मि कनक

उतरती धरा पे

लिए खनक । 


2)

पूर्वा सुहानी 

पूरब का सूरज

लिखे कहानी ।


3)

चाँद न तन्हा 

साथ रात के संग 

तारों का मेला ।


4) 

पत्ता जो गिरा 

खरगोश समझा 

आसमाँ गिरा ।


5)

शैशव काल

भोर है भोली-भाली

कोमल लाली ।


6)

रात की पारी

सूर्यास्त के बाद में 

दीये की बारी ।


7)

रुकना चाहे

जंगल में कोयल

कूकना चाहे ।


8)

हाथ में फाले 

पर, मोची हर ले

पाँव के छाले ।


9)

दूधिया भोर 

धुंध से झाँका रवि 

चमकी कोर ।


10)

हवा महकी

महुवाई गंध से 

कुछ बहकी ।


11)

जिस घर में 

बिटिया है चहके

सदा महके । 


12)

पूरी थाली को

भरता है स्वाद से

पत्नी का हाथ ।


13)

छूने न देती

दर्द का अहसास

माँ रोक लेती ।


14)

होली का रंग

चुलबुली नजरें 

फाग उमंग ।


15)

आई बहार

डेरे हो गए नीड़ 

लौटी है भीड़ ।


16)

गूंजे संगीत 

गीत गाते पत्थर 

प्रेम असर ।


17)

रख विश्वास 

भर जाएगा ताल

बुझेगी प्यास ।


18)

खो रहा धीर

पलकें न रोकना

आँखों का नीर ।


19)

भरे तालाब

बारिश की झड़ी से

उमड़े ख्वाब ।


20)

पनपे बीज

हवा, पानी, चिड़िया 

बने जरिया ।


21)

ज्वार भाटा का

जीवन है सफर

अमा पूनो का ।

---00---


□ शुचिता राठी

छिंदवाड़ा (म.प्र.)

~•~ हाइकु कवयित्री इन्दु साहू जी के हाइकु ~•~

हाइकु कवयित्री

इन्दु साहू


हाइकु

--0--

1.

किधर जाएँ

सुनसान है राहें

अंधेरी रात ।

2.

पकड़ो हाथ

माता और पिता का

रहेंगें साथ ।

3.

समय पर

कार्य पूर्ण करना

आगे बढ़ना ।

4.

शीतल जल

कलकल बहती

नदियाँ सारी ।

5.

रूप अनेक

आसमान में एक

चाँद को देखो ।

6.

सबसे प्यारा

लगे देश हमारा

आँखों का तारा ।

7.

मन में आस

सदैव ही रखना

लिए विश्वास ।

8.

निशा के बाद

आदित्य गगन में

प्रभा के साथ ।

9.

दिव्य किरणें

नयी उषा के साथ

नभ में आयीं ।

10.

नया सवेरा

सबके लिए लाया

हर्ष का घेरा ।

---00---


□ इन्दु साहू

पुरी बगीचा, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

~ हाइकु कवयित्री किरण मिश्रा जी के हाइकु ~

हाइकु कवयित्री 

किरण मिश्रा 


हाइकु 

--0--


बहरा चाँद 

रतजगे में इश्क 

तारे गवाह ।


सुर्खी पहन

गुल दुपहरिया 

सरसे पात ।


लाचार तन

आँख की किरकिरी 

बूढ़े माँ बाप ।


फिसला सूर्य 

क्षितिज उस पार

रजनी हँसी ।


पीली चूनर

खेत में लहराते 

सरसों फूल ।


हो गई भोर

खनकते कंगन

जागी रसोई ।


नाची मयूरी 

घिर आये बदरा 

सावन आया ।


भोर ने ओढ़ी

कोहरे की रजाई

छुट्टी पे रवि । 


कुएँ का जल

वृक्ष छाया शीतल

मन निर्मल ।


ईश शरण

अंतस समर्पण 

भाव दर्पण ।

---00---


□  किरण मिश्रा

~•~ हाइकुकार जयंत यादव जी के हाइकु ~•~

हाइकुकार

जयंत यादव

हाइकु 


1)
कर्ज में डूबे 
वादे हुए अधूरे
किसान रोये ।

2)
रोती बेटियां
कर रही गुहार
दहेज पाप ।

3)
आया अकाल
मरने लगे धान
सूखा नहर ।

4)
कलमकार 
करे शब्दों से वार
अब तो जाग ।

5)
पहनें मास्क
मत होना बेहाल
कोरोना काल ।

6)
आया भूकंप
हिल गयी धरती
मची तबाही ।

7)
बढ़ती गर्मी
जीना हुआ कठिन
जंगल लुप्त ।

8)
फैलती आग
जंगल हुए खाक
बारिश आस ।

9)
भीषण धूप
जीना हुआ मुहाल
खोजता छांव ।

10)
रात जो ढली
जाग उठा सूरज
भोर मुस्काई ।
---000---

~ जयंत यादव
कोतासुरा, वि.ख. - पुसौर, 
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
पिन - 496440

हाइकुकार राजीव नामदेव "राना लिधौरी" जी के हाइकु

हाइकुकार 


राजीव नामदेव "राना लिधौरी"


हाइकु 

--0--


बिकने लगी

जल, जमीन, हवा

जीवन दवा ।

***

नष्ट जंगल

नदियाँ प्रदूषित

कैसे मंगल ।

***

जल के स्रोत

जंगल व बादल

जीवन ज्योत ।

***

टेढ़ी नज़र

प्रकृति की होती है

रोते हैं सब ।

***

प्रकृति करे

बसंत बहार में

खूब श्रृंगार ।

***

करे किसानी

भारतीय किसान

वर्षा सहारे ।

***

चाँद झाँकता

आने की है उम्मीद

राह ताकता ।

***

नदी सा बहो

मत बनो सागर

खारा है पानी ।

***

स्वाति की बूँद

लक्ष्य पर पहुँच

मोती बनती ।

***

कूकी कोयल

पीला सोना खेत में

भौंरा बटोरे ।

***

मन का दीप

जब भी वह दिखे

जल ही उठे ।

***

हवा के संग

पीपल के पत्ते भी

नाच उठते ।

*****


□ राजीव नामदेव "राना लिधौरी"

नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,

टीकमगढ़ (म.प्र.) पिन-472001

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